Tuesday, 30 June 2009

ख्वाबों का पिंजर

ख्वाबों के साए में
समा ये कितना हसीं
हो जो करीब तुम इतने
न है और कोई कमी

पलकों की चिलमन से
होठों के प्यालो तक
छल्के है प्यार तुम्हारा
सागर के किनारों तक

सागर से कह दो ठहर जा तू यही

ख्वाबों के साए में
समा ये कितना हसीं

ख्वाबों का ये पिंजर
कभी कही टूट न जाए
है जो आज साथ तुम्हारा
वो कल कही छूट न जाए

ख्वाबों से कह दो कभी रूठना नही

ख्वाबों के साए में
समा ये कितना हसीं

ख्वाबों के साए में
समा ये कितना हसीं
हो जो करीब तुम इतने
न है और कोई कमी

Thursday, 18 June 2009

कान्हा तेरे प्यार में

कान्हा तेरे प्यार में....

कान्हा तेरे प्यार में
राधा हुई बावरी
कान्हा तेरे प्यार में
राधा हुई बावरी

सुध बुध गवाए
नयन तरसाए
बैठी तेरे इंतज़ार में
पलके बिछाए

कान्हा तेरे प्यार में
राधा हुई बावरी



तू क्यूँ उसे इतना सताए
करे अटखेलियाँ जाल बिछाए
गोपियों के संग रास रचाए
जो राधा के मन को बिल्कुल न भाए

कान्हा तेरे प्यार में
राधा हुई बावरी

ओ कन्हैया ब्रिज्बसी
राधा तो है तेरी दासी
ख़तम कर तू ये विरह के क्षण
बजा बांसुरी राधा के संग

कान्हा तेरे प्यार में
राधा हुई बावरी
कान्हा तेरे प्यार में
राधा हुई बावरी

कान्हा तेरे प्यार में....
कान्हा तेरे प्यार में

Wednesday, 17 June 2009

जान वे!


जान वे……..
मैं तुझपे वारी जाऊ

तुझसे है जिंदगी
तुझसे ही है मेरा प्यार
कह भी दे मुझसे
कर यु बेकरार

छुपा तू मुझसे जान--जान
हाल--दिल जो है वो करदे बयान
किस कशमकश में है तेरा मन
बस एक बार कर दे तू इज़हार
बस एक बार कर दे तू इज़हार

जान वे.....
मैं तुझपे वारी जाऊ



प्यार तो है मेरे भी दिल में
पर आए शर्म सी इकरार से
बाँहों में लेले थामके इन हाथों को
गवारा नही मुझको अब और इंतज़ार
गवारा नही मुझको अब और इंतज़ार

जान वे.........
मैं तुझपे वारी जाऊ

तुझसे है जिंदगी
तुझसे ही है मेरा प्यार
कह भी दे मुझसे
न कर यु बेकरार

जान वे......जान वे...

Thursday, 11 June 2009

उलझन!

उल्झने ज़िन्दगी की कैसे सुलझाएं,
दर्द इस दिल का कोई समझ न पाए
उल्झने ज़िन्दगी की कैसे सुलझाएं,
दर्द इस दिल का कोई समझ न पाए।

चले थे कभी किसी मंजिल की तलाश में,

न कोई साया हमसफ़र कोई साथ में..
राहें अंजानी पर आऱजू वही थी,
के दूर हो जाए ज़िन्दगी में जो कमी थी..

कोई सहारा कोई साथ कही मिल जाए....


उल्झने ज़िन्दगी की कैसे सुलझाएं,

दर्द इस दिल का कोई समझ न पाए।

फिर एक ज़र्रे की आहट ने उम्मीद सी जगाई,

मुड के जो देखा तो वो थी मेरी परछाई..
वो कहने लगी कर भरोसा तू मुझपे,
दिन-रात कोई आंच न आने दूँगी मैं तुझपे..

उस नासमझ को कोई कैसे समझाए....


उल्झने ज़िन्दगी की कैसे सुलझाएं.

दर्द इस दिल का कोई समझ न पाए।

एक लहर ने साथ देने की हामी भरी थी,
और खुशी से ठंडी हवा भी चली थी..
तेज़ धुप ने तब अपनी बाहें फैलाई,
सूख गई लहर न हवा टिक पाई..

धुप के सहारे कितनी दूर तक जाए....


उल्झने ज़िन्दगी की कैसे सुलझाएं,

दर्द इस दिल का कोई समझ न पाए।

अकेली थी रूह पर दिल नही हारा,
पानी थी मंजिल दिया चांदनी ने सहारा..
खुशी से मेरी आँखें मुस्कुराई,
कुछ पल की दूरी पे मंजिल नज़र आई..

तब रोक लिया किसीने आंसू बहाए....


उल्झने ज़िन्दगी की कैसे सुलझाएं,

दर्द इस दिल का कोई समझ न पाए।

मंजिल के इतने करीब आके,

दिल उदास हुआ एक उलझन को पाके..
एक तरफ़ दिल तो एक तरफ़ धड़कन थी,
चुनना था किसी एक को अगर पानी वो मंजिल थी..

दिल को धड़कन से अलग कोई कैसे कर पाए....


उल्झने ज़िन्दगी की कैसे सुल्झाएं,

दर्द इस दिल का कोई समझ न पाए।
उल्झने ज़िन्दगी की कैसे सुलझाएं,
दर्द इस दिल का कोई समझ न पाए।